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Rajya Sabha By Elections: क्या इस्तीफा देने वाले सांसदों को भी मिलती है पेंशन? जानिए क्या कहता है कानून | Alam Ki Khabar

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Alam Ki Khabar: पश्चिम बंगाल की तीन राज्यसभा सीटों पर उपचुनाव का ऐलान हो गया है। इस बीच सवाल उठ रहा है कि कार्यकाल पूरा होने से पहले इस्तीफा देने वाले सांसदों को पेंशन मिलती है या नहीं। जानिए संसद सदस्यों की पेंशन से जुड़े नियम।

पश्चिम बंगाल की तीन राज्यसभा सीटों पर उपचुनाव की घोषणा के बाद एक बार फिर सांसदों की पेंशन को लेकर चर्चा तेज हो गई है। विधानसभा चुनाव के बाद तृणमूल कांग्रेस के तीन राज्यसभा सांसदों ने अपने पद से इस्तीफा दे दिया था, जिसके कारण ये सीटें खाली हो गईं। अब इन रिक्त पदों पर 24 जुलाई को मतदान कराया जाएगा। इसी बीच आम लोगों के मन में यह सवाल उठ रहा है कि क्या कार्यकाल पूरा होने से पहले इस्तीफा देने वाले सांसदों को भी आजीवन पेंशन मिलती है या नहीं।

मौजूदा कानूनी व्यवस्था के अनुसार इसका जवाब हां है। संसद सदस्यों के वेतन, भत्ते और पेंशन अधिनियम, 1954 के तहत यदि कोई व्यक्ति सांसद के रूप में शपथ ले चुका है, तो वह आजीवन पेंशन पाने का पात्र बन जाता है। इसका मतलब यह है कि सांसद ने अपना पूरा कार्यकाल पूरा किया हो या बाद में स्वयं इस्तीफा दे दिया हो, केवल इस्तीफा देने से उसकी पेंशन की पात्रता समाप्त नहीं होती।

विशेषज्ञों के अनुसार इस कानून में सेवा की अवधि से अधिक महत्व सांसद की सदस्यता को दिया गया है। यानी किसी सांसद ने शपथ ग्रहण कर ली और उसके बाद किसी भी कारण से इस्तीफा दे दिया, तब भी वह मौजूदा नियमों के अनुसार पेंशन पाने का हकदार रहता है।

कितनी मिलती है सांसदों को पेंशन

वर्तमान नियमों के अनुसार पूर्व सांसदों को न्यूनतम 31 हजार रुपये प्रति माह की मूल पेंशन दी जाती है। यदि किसी सांसद ने पांच वर्ष से अधिक समय तक संसद सदस्य के रूप में कार्य किया है, तो शुरुआती पांच वर्षों के बाद प्रत्येक अतिरिक्त वर्ष या नौ महीने से अधिक की अवधि के लिए 2,500 रुपये प्रति माह अतिरिक्त पेंशन भी दी जाती है।

पेंशन के अलावा मिलती हैं ये सुविधाएं

पूर्व सांसदों को केवल मासिक पेंशन ही नहीं बल्कि कई अन्य सुविधाएं भी मिलती हैं। उन्हें पूरे भारत में प्रथम एसी श्रेणी में निःशुल्क रेल यात्रा की सुविधा मिलती है। इसके साथ एक सहयोगी को थर्ड एसी में यात्रा कराने का भी प्रावधान है। इसके अलावा केंद्र सरकार स्वास्थ्य योजना (CGHS) के तहत चिकित्सा सुविधाएं भी उपलब्ध कराई जाती हैं।

उपचुनाव क्यों हो रहे हैं

पश्चिम बंगाल से राज्यसभा के तीन सदस्यों के इस्तीफा देने के बाद ये सीटें रिक्त हो गई थीं। इन्हें भरने के लिए चुनाव आयोग ने उपचुनाव की घोषणा की है। 24 जुलाई को मतदान होगा और निर्वाचित उम्मीदवार शेष कार्यकाल के लिए राज्यसभा सदस्य बनेंगे।

क्या इस्तीफे का पेंशन पर असर पड़ता है?

कानूनी विशेषज्ञों का कहना है कि यदि सांसद ने शपथ ले ली है, तो बाद में दिया गया इस्तीफा उसकी पेंशन पर असर नहीं डालता। हालांकि यदि किसी सदस्य की सदस्यता कानून के तहत अयोग्यता या अन्य विशेष परिस्थितियों में समाप्त होती है, तो अलग कानूनी प्रावधान लागू हो सकते हैं।

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सांसदों की पेंशन को लेकर भ्रम दूर करना जरूरी

राज्यसभा उपचुनाव के बीच सांसदों की पेंशन को लेकर कई तरह की चर्चाएं सामने आई हैं। लेकिन मौजूदा कानून स्पष्ट करता है कि सांसद के रूप में शपथ लेने के बाद केवल इस्तीफा देने से पेंशन का अधिकार समाप्त नहीं होता। यही कारण है कि कार्यकाल पूरा होने से पहले इस्तीफा देने वाले सांसद भी निर्धारित नियमों के तहत आजीवन पेंशन और अन्य सुविधाओं के पात्र बने रहते हैं।

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